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रिकॉर्ड में धान, गोदाम खाली! कबीरधाम में 70 हजार क्विंटल शॉर्टेज से हड़कंप

कवर्धा। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी समाप्त होने और उठाव प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही कबीरधाम जिले में बड़ा धान शॉर्टेज मामला सामने आया है। मार्कफेड की रिपोर्ट में जिले की विभिन्न सहकारी समितियों में लगभग 70 हजार क्विंटल धान की कमी दर्ज होने के बाद खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया है कि रिकॉर्ड में धान खरीदी पूरी दिखाई गई, लेकिन उपार्जन केंद्रों में भौतिक रूप से धान मौजूद नहीं है। उन्होंने इसे धान खरीदी प्रक्रिया में बड़े स्तर की अनियमितता और संभावित घोटाले का संकेत बताया है।

छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है, जहां हर वर्ष करोड़ों क्विंटल धान खरीदा जाता है। लेकिन खरीदी के बाद कस्टम मिलिंग के लिए धान उठाव की प्रक्रिया के दौरान इतनी बड़ी मात्रा में धान गायब होना पूरे तंत्र पर सवाल खड़े कर रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिले की कई समितियों में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर पाया गया है।

सूत्रों के मुताबिक भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आए आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि खरीदी, भंडारण और उठाव प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि किसानों से खरीदा गया हजारों क्विंटल धान आखिर कहां गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। मामले ने समिति प्रबंधकों, कम्प्यूटर ऑपरेटरों और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की भूमिका को भी संदेह के घेरे में ला दिया है।

आकाश केशरवानी ने कहा कि 26 मई को कलेक्टर द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक में 29 मई तक सभी उपार्जन केंद्रों से धान उठाव पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कागजों में धान खरीदी और उठाव दिखाकर अनियमितताओं पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग, जिला विपणन संघ और जिला नोडल अधिकारियों पर संबंधित प्रभारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि उपार्जन केंद्रों, गोदामों और राइस मिलों का स्वतंत्र और निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए तो धान शॉर्टेज का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।

मामले में नियमों के तहत कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रावधानों के अनुसार धान स्कंध में 0.5 प्रतिशत से अधिक कमी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस, 1 प्रतिशत से अधिक कमी पर विभागीय जांच और 2 प्रतिशत से अधिक कमी पर निलंबन तथा एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है। बावजूद इसके अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी या केंद्र प्रभारी पर बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है।

मार्कफेड की 27 मई की रिपोर्ट में कामठी, सूरजपुरा, पेण्ड्रीकला, जुनवानी, रणवीरपुर, उसरवाही, कुरवा, समनापुर, बोदातरेगांव, धरमगढ़, कुकदूर, मोहगांव, सहसपुर लोहारा समेत कई उपार्जन केंद्रों में बड़ी मात्रा में धान उठाव लंबित और शॉर्टेज की स्थिति दर्ज की गई है।

युवा कांग्रेस ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, सभी उपार्जन केंद्रों और राइस मिलों का संयुक्त भौतिक सत्यापन कराने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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